मेरा देखना,
मेरी नज़दीकियाँ,
आपके सुकून में ख़लल डालती हैं।
जो कि, नहीं है हिस्सा मेरे किरदार का।
दोस्त नहीं हूँ, माना,
पर दुश्मन भी तो नहीं हूँ,
उस लम्हे की बात करूँ,
मैंने वो किया जो अकेला रास्ता था मेरा!
और आपने वो, जो आपको ठीक लगा!
शांत रहना मेरा,
समझना मत, कि शिकायत है आपसे,
कोई गिला नहीं, कोई शिकवा नहीं,
बस एक फ़रियाद है… ख़ैरियत भरी।
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